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रोसेल की खेती

रोसेल (लाल अंबाडी) एक औषधीय और व्यावसायिक फसल है जिसकी पत्तियां और फूल (कैलिक्स) जूस, जैम, चाय और हेल्थ प्रोडक्ट्स में उपयोग होते हैं। इसकी खेती कम लागत में की जा सकती है और बाजार में इसकी अच्छी मांग होने के कारण किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

🌺 परिचय

रोसेल एक हर्बल और औषधीय पौधा है जिसे अंग्रेजी में Roselle (Hibiscus sabdariffa) कहा जाता है। इसके लाल रंग के फूल (कैलिक्स) से जूस, स्क्वैश, चाय और औषधीय उत्पाद बनाए जाते हैं। इसमें विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं, जिससे इसकी मांग हेल्थ इंडस्ट्री में तेजी से बढ़ रही है।


🌾 उपयुक्त मिट्टी और जलवायु

  • रोसेल की खेती के लिए दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है।
  • मिट्टी का pH मान 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए।
  • गर्म और आर्द्र जलवायु इसके लिए अच्छी होती है।
  • अच्छी जल निकासी वाली भूमि में इसकी खेती बेहतर होती है।

🌱 बुवाई का समय

  • जून से जुलाई (खरीफ मौसम)

🌿 खेती करने की विधि

  • खेत को अच्छी तरह जोतकर तैयार करें।
  • बीजों को लगभग 60 × 45 सेंटीमीटर की दूरी पर बोएं।
  • एक एकड़ खेत के लिए लगभग 3 से 4 किलो बीज की आवश्यकता होती है।
  • बुवाई से पहले खेत में गोबर की खाद डालना लाभदायक होता है।

🌾 उत्पादन

  • रोसेल की फसल लगभग 5 से 6 महीने में तैयार हो जाती है।
  • एक एकड़ खेत से अच्छी मात्रा में फूल (कैलिक्स) और पत्तियां प्राप्त होती हैं।

💰 संभावित मुनाफा

  • रोसेल की बाजार में अच्छी कीमत मिलती है।
  • एक एकड़ खेती से किसान लगभग ₹1 लाख से ₹3 लाख तक का मुनाफा कमा सकते हैं।

🌱 रोसेल की खेती के फायदे

✔ औषधीय और हेल्थ प्रोडक्ट्स में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है।
✔ जूस, चाय और जैम बनाने में उपयोग होता है।
✔ कम लागत में अच्छी आय देने वाली फसल है।
✔ पोषक तत्वों से भरपूर फसल है।


👨‍🌾 किसानों के लिए सुझाव

  • अच्छी गुणवत्ता वाले बीज का उपयोग करें।
  • समय-समय पर निराई-गुड़ाई करें।
  • फसल की नियमित निगरानी करें।
  • कटाई सही समय पर करें ताकि गुणवत्ता बनी रहे।