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चकोरी की खेती

चकोरी एक औषधीय और हर्बल पौधा है जिसका उपयोग दवाइयों, सलाद और हेल्थ प्रोडक्ट्स में किया जाता है। इसकी जड़ और पत्तियां दोनों उपयोगी होती हैं। इसकी खेती कम लागत में की जा सकती है और बाजार में इसकी बढ़ती मांग के कारण किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

🌿 परिचय

चकोरी (Chicory) एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है जिसकी जड़ों का उपयोग कॉफी के विकल्प (Coffee Substitute) के रूप में किया जाता है, जबकि इसकी पत्तियां सलाद और सब्जी में उपयोग होती हैं। इसमें कई औषधीय गुण पाए जाते हैं, जिससे इसकी मांग आयुर्वेदिक और खाद्य उद्योग में बढ़ रही है।


🌾 उपयुक्त मिट्टी और जलवायु

  • चकोरी की खेती के लिए दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है।
  • मिट्टी का pH मान 5.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए।
  • ठंडी और मध्यम जलवायु इसके लिए अच्छी मानी जाती है।
  • अच्छी जल निकासी वाली भूमि में इसकी खेती बेहतर होती है।

🌱 बुवाई का समय

  • अक्टूबर से नवंबर (रबी मौसम)

🌿 खेती करने की विधि

  • खेत को अच्छी तरह जोतकर भुरभुरा बना लें।
  • बीजों को लगभग 30 सेंटीमीटर की दूरी पर बोएं।
  • एक एकड़ खेत के लिए लगभग 4 से 5 किलो बीज की आवश्यकता होती है।
  • बुवाई से पहले गोबर की खाद डालना लाभदायक होता है।

🌾 उत्पादन

  • चकोरी की फसल लगभग 120 से 140 दिनों में तैयार हो जाती है।
  • एक एकड़ खेत से अच्छी मात्रा में जड़ और पत्तियां प्राप्त होती हैं।

💰 संभावित मुनाफा

  • चकोरी की बाजार में अच्छी मांग रहती है।
  • एक एकड़ खेती से किसान लगभग ₹80,000 से ₹2 लाख तक का मुनाफा कमा सकते हैं।

🌱 चकोरी की खेती के फायदे

✔ कॉफी के विकल्प के रूप में इसकी मांग अधिक है।
✔ औषधीय और हेल्थ प्रोडक्ट्स में उपयोग होता है।
✔ कम लागत में अच्छी आय देता है।
✔ जड़ और पत्तियां दोनों उपयोगी हैं।


👨‍🌾 किसानों के लिए सुझाव

  • अच्छी गुणवत्ता वाले बीज का चयन करें।
  • खेत में जल निकासी का ध्यान रखें।
  • समय-समय पर निराई-गुड़ाई करें।
  • फसल की नियमित निगरानी करें।