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सिट्रोनेला की खेती

परिचय

सिट्रोनेला एक सुगंधित घास वाली औषधीय फसल है। इसके पौधों से निकलने वाले तेल का उपयोग मच्छर भगाने वाले प्रोडक्ट, परफ्यूम, साबुन, कॉस्मेटिक्स और दवाइयों में किया जाता है। वर्तमान समय में इसकी बाजार में अच्छी मांग है, इसलिए किसान इसकी खेती करके अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।


🌾 खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी और जलवायु

  • सिट्रोनेला की खेती लगभग सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है।

  • दोमट और हल्की बलुई मिट्टी इसके लिए सबसे अच्छी मानी जाती है।

  • गर्म और आर्द्र जलवायु इसके लिए उपयुक्त होती है।

  • जहाँ पानी का जमाव न हो वहाँ इसकी खेती अच्छी होती है।


🌱 बुवाई का सही समय

सिट्रोनेला की रोपाई मुख्य रूप से इन महीनों में की जाती है:

  • फरवरी से मार्च

  • जुलाई से अगस्त

बारिश के मौसम में इसकी रोपाई करने से पौधों की वृद्धि अच्छी होती है।


🌿 पौध लगाने की विधि

  • खेत को अच्छी तरह जुताई करके समतल कर लें।

  • पौधों को लगभग 60 × 60 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाएँ।

  • एक एकड़ खेत में लगभग 8000 से 10000 पौधे लगाए जाते हैं।

  • रोपाई के समय खेत में गोबर की खाद डालना लाभदायक होता है।


🌾 उत्पादन

  • सिट्रोनेला से प्रति एकड़ लगभग 150 से 200 लीटर तेल प्राप्त हो सकता है।

  • साल में 3–4 बार इसकी कटाई की जा सकती है।

  • सही देखभाल करने पर उत्पादन और अधिक हो सकता है।


💰 संभावित मुनाफा

  • सिट्रोनेला तेल की बाजार में अच्छी कीमत मिलती है।

  • एक एकड़ खेती से किसान लगभग ₹1.5 लाख से ₹3 लाख तक का मुनाफा कमा सकते हैं।

  • यह एक कम लागत और अधिक लाभ देने वाली फसल मानी जाती है।


🌱 खेती के फायदे

✔ औषधीय और सुगंधित फसल होने के कारण इसकी बाजार में मांग रहती है।
✔ एक बार पौध लगाने के बाद कई वर्षों तक उत्पादन मिलता है।
✔ मच्छर भगाने वाले उत्पादों में इसका उपयोग होने से इसकी कीमत अच्छी रहती है।
✔ कम लागत में अधिक लाभ देने वाली फसल है।


👨‍🌾 किसानों के लिए विशेष सुझाव

  • खेत में जलभराव न होने दें।

  • समय-समय पर निराई-गुड़ाई करते रहें।

  • कटाई के तुरंत बाद पत्तियों से तेल निकालना बेहतर रहता है।

  • अच्छी गुणवत्ता के पौधे लगाने से उत्पादन अधिक मिलता है।