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भृंगराज की खेती

भृंगराज एक प्रसिद्ध औषधीय पौधा है जिसका उपयोग बालों के तेल, आयुर्वेदिक दवाइयों और हर्बल उत्पादों में किया जाता है। इसकी खेती कम लागत में की जा सकती है और बाजार में इसकी लगातार मांग के कारण किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

🌿 परिचय

भृंगराज (Eclipta alba) एक महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक पौधा है जिसे “बालों का राजा” भी कहा जाता है। इसका उपयोग बालों को मजबूत बनाने, झड़ना रोकने और त्वचा संबंधी समस्याओं के इलाज में किया जाता है। इसके पत्ते और पूरे पौधे का उपयोग तेल, पाउडर और दवाइयों में किया जाता है। इसकी बढ़ती मांग के कारण यह किसानों के लिए लाभदायक फसल बन रही है।


🌾 उपयुक्त मिट्टी और जलवायु

  • भृंगराज की खेती के लिए नम और उपजाऊ दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है।
  • मिट्टी का pH मान 5.5 से 7 के बीच होना चाहिए।
  • गर्म और आर्द्र जलवायु इसके लिए अच्छी होती है।
  • हल्की नमी वाली जमीन में इसकी खेती बेहतर होती है।

🌱 बुवाई / रोपाई का समय

  • फरवरी से मार्च
  • जून से जुलाई

🌿 खेती करने की विधि

  • भृंगराज की खेती बीज या पौध दोनों से की जा सकती है।
  • पौधों को लगभग 30 × 30 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाएं।
  • एक एकड़ खेत में लगभग 40,000 से 50,000 पौधे लगाए जा सकते हैं।
  • रोपाई से पहले जैविक खाद डालना लाभदायक होता है।

🌾 उत्पादन

  • पहली कटाई लगभग 2 से 3 महीने में हो जाती है।
  • साल में 3 से 4 बार कटाई की जा सकती है।
  • एक एकड़ खेत से लगभग 15 से 20 क्विंटल सूखा उत्पादन प्राप्त हो सकता है।

💰 संभावित मुनाफा

  • भृंगराज की बाजार में अच्छी कीमत मिलती है।
  • एक एकड़ खेती से किसान लगभग ₹1 लाख से ₹3 लाख तक का मुनाफा कमा सकते हैं।

🌱 भृंगराज की खेती के फायदे

✔ बालों और आयुर्वेदिक उत्पादों में इसकी मांग अधिक है।
✔ साल में कई बार कटाई से लगातार आय होती है।
✔ कम लागत में अच्छी आय देने वाली फसल है।
✔ हर्बल और कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में उपयोग होता है।


👨‍🌾 किसानों के लिए सुझाव

  • खेत में नमी बनाए रखें लेकिन पानी जमा न होने दें।
  • अच्छी गुणवत्ता वाले बीज या पौध का उपयोग करें।
  • समय-समय पर कटाई करें ताकि नई वृद्धि होती रहे।
  • जैविक खाद का उपयोग करने से उत्पादन बेहतर होता है।