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ईरानी अकरकरा की खेती

ईरानी अकरकरा एक उच्च मूल्य वाली औषधीय फसल है जिसका उपयोग आयुर्वेदिक और यूनानी दवाइयों में किया जाता है। इसकी जड़ों की बाजार में बहुत अधिक मांग होती है, जिससे किसान कम क्षेत्र में भी अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

🌿 परिचय

ईरानी अकरकरा (Anacyclus pyrethrum) एक प्रसिद्ध औषधीय पौधा है जिसकी जड़ों का उपयोग दवाइयों में किया जाता है। यह विशेष रूप से दांत दर्द, कमजोरी और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार में उपयोगी होता है। इसकी मांग आयुर्वेदिक, यूनानी और हर्बल उद्योग में लगातार बढ़ रही है, जिससे यह किसानों के लिए एक लाभदायक फसल बन गई है।


🌾 उपयुक्त मिट्टी और जलवायु

  • अकरकरा की खेती के लिए हल्की दोमट या बलुई मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है।
  • मिट्टी का pH मान 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए।
  • ठंडी और शुष्क जलवायु इसके लिए बेहतर होती है।
  • अच्छी जल निकासी वाली जमीन में इसकी खेती करें।

🌱 बुवाई का समय

  • अक्टूबर से नवंबर (रबी मौसम)

🌿 खेती करने की विधि

  • खेत को अच्छी तरह जोतकर तैयार करें।
  • बीजों को लगभग 30 × 30 सेंटीमीटर की दूरी पर बोएं।
  • एक एकड़ खेत के लिए लगभग 2 से 3 किलो बीज की आवश्यकता होती है।
  • बुवाई से पहले बीज उपचार करना लाभदायक होता है।
  • गोबर की खाद का उपयोग करें।

🌾 उत्पादन

  • अकरकरा की फसल लगभग 6 से 7 महीने में तैयार हो जाती है।
  • एक एकड़ खेत से लगभग 4 से 6 क्विंटल सूखी जड़ प्राप्त हो सकती है।

💰 संभावित मुनाफा

  • अकरकरा की जड़ों की बाजार में बहुत अच्छी कीमत मिलती है।
  • एक एकड़ खेती से किसान लगभग ₹2 लाख से ₹5 लाख तक का मुनाफा कमा सकते हैं (क्वालिटी और डिमांड पर निर्भर करता है)।

🌱 अकरकरा की खेती के फायदे

✔ उच्च मूल्य वाली औषधीय फसल है।
✔ आयुर्वेदिक और यूनानी दवाइयों में उपयोग होता है।
✔ कम क्षेत्र में अधिक लाभ देती है।
✔ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसकी मांग है।


👨‍🌾 किसानों के लिए सुझाव

  • अच्छी गुणवत्ता वाले बीज का चयन करें।
  • खेत में जल निकासी का विशेष ध्यान रखें।
  • समय-समय पर निराई-गुड़ाई करें।
  • सही समय पर जड़ों की खुदाई करें ताकि गुणवत्ता बनी रहे।