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Grow with Kepto Agro
Product Description
🌿 परिचय
गोखरू (Tribulus terrestris) एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है जिसका उपयोग आयुर्वेद में कई प्रकार की दवाइयों में किया जाता है। इसके फल, बीज और पौधे के अन्य भाग औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। इसका उपयोग मूत्र संबंधी रोग, कमजोरी और शरीर की शक्ति बढ़ाने में किया जाता है। इसकी बढ़ती मांग के कारण यह किसानों के लिए लाभदायक फसल बन रही है।
🌾 उपयुक्त मिट्टी और जलवायु
- गोखरू की खेती के लिए बलुई या हल्की दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है।
- मिट्टी का pH मान 6 से 8 के बीच होना चाहिए।
- गर्म और शुष्क जलवायु इसके लिए बेहतर होती है।
- यह फसल कम पानी में भी अच्छी तरह उगती है।
🌱 बुवाई का समय
- जून से जुलाई (खरीफ मौसम)
- फरवरी से मार्च (कुछ क्षेत्रों में)
🌿 खेती करने की विधि
- खेत को अच्छी तरह जोतकर तैयार करें।
- बीजों को लगभग 30 × 30 सेंटीमीटर की दूरी पर बोएं।
- एक एकड़ खेत के लिए लगभग 2 से 3 किलो बीज की आवश्यकता होती है।
- बुवाई से पहले बीज उपचार करना लाभदायक होता है।
- गोबर की खाद का उपयोग करें।
🌾 उत्पादन
- गोखरू की फसल लगभग 4 से 5 महीने में तैयार हो जाती है।
- एक एकड़ खेत से अच्छी मात्रा में फल और बीज प्राप्त होते हैं।
💰 संभावित मुनाफा
- गोखरू की बाजार में अच्छी कीमत मिलती है।
- एक एकड़ खेती से किसान लगभग ₹1 लाख से ₹3 लाख तक का मुनाफा कमा सकते हैं।
🌱 गोखरू की खेती के फायदे
✔ औषधीय फसल होने के कारण इसकी मांग अधिक है।
✔ कम पानी और कम लागत में खेती की जा सकती है।
✔ आयुर्वेदिक और हेल्थ प्रोडक्ट्स में उपयोग होता है।
✔ सूखा सहन करने वाली फसल है।
👨🌾 किसानों के लिए सुझाव
- अच्छी गुणवत्ता वाले बीज का उपयोग करें।
- समय-समय पर निराई-गुड़ाई करें।
- फसल की नियमित निगरानी करें।
- सही समय पर कटाई करें ताकि गुणवत्ता बनी रहे।








