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Product Description
🌿 परिचय
रोज़मेरी एक बहुवर्षीय (Perennial) औषधीय और सुगंधित पौधा है जो झाड़ी के रूप में बढ़ता है। इसकी पत्तियों से निकलने वाला तेल बहुत मूल्यवान होता है और इसका उपयोग आयुर्वेदिक दवाइयों, हर्बल उत्पादों, परफ्यूम, कॉस्मेटिक्स और मसालों में किया जाता है। भारत में इसकी खेती धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रही है क्योंकि इससे किसानों को अच्छा आर्थिक लाभ मिल सकता है।
🌾 उपयुक्त मिट्टी और जलवायु
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रोज़मेरी की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है।
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इसका pH मान 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए।
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हल्की ठंडी और मध्यम जलवायु इसके लिए अच्छी होती है।
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अधिक पानी जमा होने वाली जमीन में इसकी खेती नहीं करनी चाहिए।
🌱 बुवाई का समय
रोज़मेरी की रोपाई मुख्य रूप से इन महीनों में की जाती है:
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फरवरी से मार्च
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सितंबर से अक्टूबर
🌿 पौध लगाने की विधि
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खेत को अच्छी तरह जोतकर समतल करें।
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पौधों को लगभग 45 × 45 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाएँ।
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एक एकड़ खेत में लगभग 18,000 से 20,000 पौधे लगाए जा सकते हैं।
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रोपाई से पहले खेत में गोबर की खाद डालना लाभदायक होता है।
🌾 उत्पादन
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रोज़मेरी के पौधों से साल में 2 से 3 बार कटाई की जा सकती है।
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प्रति एकड़ लगभग 20–25 क्विंटल हरी पत्तियां प्राप्त हो सकती हैं।
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इससे लगभग 40–60 किलो तेल प्राप्त किया जा सकता है।
💰 संभावित मुनाफा
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रोज़मेरी तेल की बाजार में अच्छी कीमत होती है।
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एक एकड़ खेती से किसान लगभग ₹1 लाख से ₹2.5 लाख तक का मुनाफा कमा सकते हैं।
🌱 रोज़मेरी की खेती के फायदे
✔ औषधीय और हर्बल उत्पादों में इसकी बहुत मांग है।
✔ कम पानी में भी इसकी खेती की जा सकती है।
✔ एक बार लगाने के बाद कई सालों तक उत्पादन मिलता है।
✔ कॉस्मेटिक और हर्बल इंडस्ट्री में इसका उपयोग अधिक होता है।
👨🌾 किसानों के लिए सुझाव
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खेत में पानी जमा न होने दें।
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समय-समय पर निराई-गुड़ाई करें।
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अच्छी गुणवत्ता की पौध का उपयोग करें।
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कटाई के बाद पत्तियों से तुरंत तेल निकालना अधिक लाभदायक होता है।








