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मोरिंगा की खेती

मोरिंगा (सहजन) एक पौष्टिक और औषधीय फसल है जिसे “सुपरफूड” भी कहा जाता है। इसकी फलियां, पत्तियां और बीज सभी उपयोगी होते हैं। इसकी खेती कम लागत में की जा सकती है और बाजार में इसकी अच्छी मांग होने के कारण किसान इससे अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

🌿 परिचय

मोरिंगा, जिसे सहजन या ड्रमस्टिक के नाम से भी जाना जाता है, एक बहुउपयोगी पौधा है। इसकी फलियां सब्जी के रूप में उपयोग होती हैं जबकि पत्तियों और बीजों से औषधीय उत्पाद, पाउडर और तेल बनाया जाता है। पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण इसकी मांग देश और विदेश दोनों में तेजी से बढ़ रही है।


🌾 उपयुक्त मिट्टी और जलवायु

  • मोरिंगा की खेती के लिए दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है।

  • मिट्टी का pH मान 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए।

  • गर्म और शुष्क जलवायु इसके लिए अच्छी मानी जाती है।

  • जहाँ पानी का जमाव न हो, वहाँ इसकी खेती बेहतर होती है।


🌱 बुवाई का समय

मोरिंगा की बुवाई मुख्य रूप से इन महीनों में की जाती है:

  • जून से जुलाई (मानसून)

  • फरवरी से मार्च


🌿 पौध लगाने की विधि

  • खेत को अच्छी तरह जुताई करके समतल कर लें।

  • पौधों को लगभग 10 × 10 फीट की दूरी पर लगाएँ।

  • एक एकड़ खेत में लगभग 400 से 500 पौधे लगाए जा सकते हैं।

  • रोपाई से पहले खेत में गोबर की खाद डालना लाभदायक होता है।


🌾 उत्पादन

  • एक पौधे से साल में लगभग 40–60 किलो फलियां प्राप्त हो सकती हैं।

  • एक एकड़ खेत से लगभग 80 से 120 क्विंटल उत्पादन हो सकता है।


💰 संभावित मुनाफा

  • मोरिंगा की फलियों की बाजार में अच्छी कीमत मिलती है।

  • एक एकड़ खेती से किसान लगभग ₹1.5 लाख से ₹3 लाख तक का मुनाफा कमा सकते हैं।


🌱 मोरिंगा की खेती के फायदे

✔ पौष्टिक और औषधीय फसल होने के कारण इसकी मांग अधिक है।
✔ कम पानी में भी इसकी खेती की जा सकती है।
✔ पत्तियां, फलियां और बीज सभी उपयोगी होते हैं।
✔ एक बार लगाने के बाद कई वर्षों तक उत्पादन मिलता है।


👨‍🌾 किसानों के लिए विशेष सुझाव

  • खेत में पानी जमा न होने दें।

  • समय-समय पर पौधों की छंटाई करते रहें।

  • जैविक खाद का उपयोग करने से उत्पादन बढ़ता है।

  • फलियों की समय पर तुड़ाई करने से अच्छी कीमत मिलती है।