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ग्वार फली की खेती

ग्वार फली एक महत्वपूर्ण दलहनी फसल है जिसका उपयोग सब्जी के साथ-साथ औद्योगिक उत्पादों में भी किया जाता है। इसकी खेती कम पानी और कम लागत में की जा सकती है। ग्वार से बनने वाला ग्वार गम (Guar Gum) अंतरराष्ट्रीय बाजार में बहुत मांग में रहता है, इसलिए इसकी खेती किसानों के लिए लाभदायक मानी जाती है।

🌾 परिचय

ग्वार फली एक दलहनी फसल है जिसे मुख्य रूप से राजस्थान, हरियाणा और गुजरात में उगाया जाता है। इसके पौधे की फलियों का उपयोग सब्जी के रूप में किया जाता है जबकि इसके बीज से ग्वार गम बनाया जाता है जिसका उपयोग खाद्य उद्योग, दवाइयों, टेक्सटाइल और तेल उद्योग में किया जाता है। इसकी बढ़ती मांग के कारण किसान इसकी खेती करके अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।


🌾 उपयुक्त मिट्टी और जलवायु

  • ग्वार की खेती के लिए बलुई या हल्की दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है।

  • मिट्टी का pH मान 7 से 8 के बीच होना चाहिए।

  • गर्म और शुष्क जलवायु इसके लिए बेहतर होती है।

  • यह फसल कम पानी में भी अच्छी तरह उग सकती है।


🌱 बुवाई का समय

ग्वार की बुवाई मुख्य रूप से खरीफ मौसम में की जाती है।

  • जून से जुलाई


🌿 खेती करने की विधि

  • खेत को अच्छी तरह जोतकर समतल करें।

  • बीजों को लगभग 30 से 45 सेंटीमीटर की दूरी पर बोएं।

  • एक एकड़ खेत के लिए लगभग 8 से 10 किलो बीज की आवश्यकता होती है।

  • बुवाई से पहले खेत में गोबर की खाद डालना लाभदायक होता है।


🌾 उत्पादन

  • ग्वार की फसल लगभग 90 से 120 दिनों में तैयार हो जाती है।

  • एक एकड़ खेत से लगभग 8 से 12 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हो सकता है।


💰 संभावित मुनाफा

  • ग्वार की बाजार में अच्छी मांग रहती है।

  • एक एकड़ खेती से किसान लगभग ₹40,000 से ₹80,000 तक का मुनाफा कमा सकते हैं (बाजार कीमत पर निर्भर करता है)।


🌱 ग्वार की खेती के फायदे

✔ कम पानी में भी इसकी खेती की जा सकती है।
✔ ग्वार गम की अंतरराष्ट्रीय बाजार में बहुत मांग है।
✔ कम लागत में अच्छी आय देने वाली फसल है।
✔ यह मिट्टी की उर्वरता को भी बढ़ाने में मदद करती है।


👨‍🌾 किसानों के लिए सुझाव

  • अच्छी गुणवत्ता वाले बीज का उपयोग करें।

  • समय-समय पर निराई-गुड़ाई करें।

  • खेत में जल निकासी का ध्यान रखें।

  • कीट और रोगों से बचाव के लिए नियमित निगरानी करें।