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Product Description
🌸 परिचय
केसर एक बहुमूल्य मसाला है जिसे अंग्रेजी में Saffron कहा जाता है। यह Crocus sativus नामक पौधे के फूल से प्राप्त होता है। इसके लाल रंग के रेशे ही असली केसर होते हैं जिनकी बाजार में बहुत अधिक कीमत होती है। केसर की मांग भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बहुत ज्यादा है, इसलिए इसकी खेती किसानों के लिए काफी लाभदायक मानी जाती है।
🌾 उपयुक्त मिट्टी और जलवायु
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केसर की खेती के लिए दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है।
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मिट्टी का pH मान 6 से 8 के बीच होना चाहिए।
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ठंडी और शुष्क जलवायु इसके लिए उपयुक्त होती है।
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जहाँ पानी का जमाव न हो, वहाँ इसकी खेती अच्छी होती है।
🌱 बुवाई का समय
केसर की बुवाई का सही समय:
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जुलाई से सितंबर
इस समय लगाए गए कंद (Bulbs) अच्छी तरह विकसित होते हैं।
🌿 खेती करने की विधि
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खेत को अच्छी तरह जोतकर समतल करें।
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केसर के कंद (Bulbs) को लगभग 10 से 15 सेंटीमीटर गहराई में लगाएं।
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पौधों के बीच लगभग 10 × 10 सेंटीमीटर की दूरी रखें।
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रोपाई से पहले खेत में गोबर की खाद डालना लाभदायक होता है।
🌾 उत्पादन
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केसर के पौधे लगभग 3 से 4 महीने में फूल देना शुरू कर देते हैं।
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एक एकड़ खेत से लगभग 2 से 3 किलो केसर प्राप्त हो सकता है।
💰 संभावित मुनाफा
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केसर की बाजार में कीमत बहुत अधिक होती है।
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एक किलो केसर की कीमत लगभग ₹1.5 लाख से ₹3 लाख तक हो सकती है।
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एक एकड़ खेती से किसान लगभग ₹3 लाख से ₹8 लाख तक का मुनाफा कमा सकते हैं।
🌱 केसर की खेती के फायदे
✔ दुनिया के सबसे महंगे मसालों में से एक है।
✔ कम क्षेत्र में भी अधिक लाभ मिलता है।
✔ औषधीय और खाद्य उद्योग में इसकी मांग बहुत अधिक है।
✔ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसकी अच्छी कीमत मिलती है।
👨🌾 किसानों के लिए सुझाव
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अच्छी गुणवत्ता के कंद (Bulbs) का उपयोग करें।
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खेत में जल निकासी अच्छी रखें।
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समय-समय पर निराई-गुड़ाई करें।
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फूल आने पर सावधानी से केसर के रेशे निकालें।








