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मूंग की खेती

मूंग एक प्रमुख दलहनी फसल है जो कम समय में तैयार हो जाती है और कम लागत में अच्छी आमदनी देती है। यह फसल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी सहायक होती है और इसकी बाजार में हमेशा अच्छी मांग रहती है।

🌾 परिचय

मूंग (Green Gram) एक महत्वपूर्ण दलहनी फसल है जिसे दाल, अंकुरित अनाज और अन्य खाद्य पदार्थों में उपयोग किया जाता है। इसमें प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है, इसलिए यह पोषण के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। मूंग की खेती किसानों के लिए एक अच्छा विकल्प है क्योंकि यह जल्दी तैयार होने वाली और कम लागत वाली फसल है।


🌾 उपयुक्त मिट्टी और जलवायु

  • मूंग की खेती के लिए हल्की दोमट या बलुई मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है।
  • मिट्टी का pH मान 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए।
  • गर्म और शुष्क जलवायु इसके लिए अच्छी होती है।
  • अच्छी जल निकासी वाली भूमि में इसकी खेती बेहतर होती है।

🌱 बुवाई का समय

मूंग की बुवाई साल में 2–3 बार की जा सकती है:

  • खरीफ: जून से जुलाई
  • रबी (कुछ क्षेत्रों में): अक्टूबर से नवंबर
  • ज़ायद: मार्च से अप्रैल

🌿 खेती करने की विधि

  • खेत को अच्छी तरह जोतकर समतल करें।
  • बीजों को लगभग 25 से 30 सेंटीमीटर की दूरी पर बोएं।
  • एक एकड़ खेत के लिए लगभग 8 से 10 किलो बीज की आवश्यकता होती है।
  • बुवाई से पहले बीज उपचार करना लाभदायक होता है।

🌾 उत्पादन

  • मूंग की फसल लगभग 60 से 75 दिनों में तैयार हो जाती है।
  • एक एकड़ खेत से लगभग 5 से 7 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हो सकता है।

💰 संभावित मुनाफा

  • मूंग की बाजार में अच्छी कीमत मिलती है।
  • एक एकड़ खेती से किसान लगभग ₹30,000 से ₹70,000 तक का मुनाफा कमा सकते हैं।

🌱 मूंग की खेती के फायदे

✔ कम समय में तैयार होने वाली फसल है।
✔ कम पानी और कम लागत में खेती की जा सकती है।
✔ मिट्टी में नाइट्रोजन बढ़ाकर उर्वरता सुधारती है।
✔ बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है।


👨‍🌾 किसानों के लिए सुझाव

  • अच्छे गुणवत्ता वाले बीज का चयन करें।
  • समय-समय पर निराई-गुड़ाई करें।
  • कीट और रोगों से बचाव के लिए नियमित निगरानी रखें।
  • फसल पकने पर समय पर कटाई करें।